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पिछले दिनों दिगम्बर परम्परा के जैन सन्त क्रन्तिकारी मुनि श्री तरुण सागर जी के हरियाणा सरकार के आमन्त्रण पर विधानसभा में हुए उदबोधन के पश्चात मुनि श्री की मुनिचर्या पर स्तरहीन कमेंट करने वाले व मुनि श्री के फोटो के समकक्ष अश्लीलता की जनक किसी कलाकार का चित्र नत्थी कर फ़िल्मी संगीतकार विशाल ददलानी ने अपनी मानसिक विकृति का परिचय दिया, और इसी स्वछन्द व निरंकुश वृति के द्योतक एंव बदजुबानी के प्रतीक कॉंग्रेसी नेता तहसीन पूनावाला द्वारा ददलानी के स्वर में स्वर मिला कर मुनि श्री की मुनिचर्या पर कटाक्ष एंव आपत्तिजनक टिप्पणियॉ करने के फलस्वरूप सम्पुर्ण जैन समुदाय में गहरा आक्रोश हैं, और स्वभाविक भी हैं कि अपने त्यागी-वैरागी साधू-सन्तों पर कुछ सिरफिरों के शाब्दिक हमले से सम्पुर्ण जैन समुदाय आहत हुआ हैं, चूँकि इस वारदात का न बल्कि सम्पुर्ण जैन समाज की और से बल्कि विभिन्न धर्मो व विभिन्न मान्यताओं के लोगों ने भी पुरजोर आवाज में विरोध प्रकट किया हैं, तथा कुछ जगहों पर इन तत्वों के विरुद्ध क़ानूनी करवाई भी की गई हैं, आप पार्टी से जुड़े विशाल ददलानी के इस कृत्य पर आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो श्री अरविन्द केजरीवाल ने पहले तथा दिल्ली के मंत्री एंव आप नेता श्री सत्येंद्र जैन ने मुनि श्री तरुण सागर जी से रूबरू मिल कर इस घटना के सन्दर्भ में माफ़ी मांगी हैं, हालाँकि ऐसे कृत्य के लिए माफ़ी शब्द नाकाफी हैं, माफ़ी तो श्री अरविन्द केजरीवाल को इस बात के लिए भी मांगनी चाहिए कि दिल्ली विधानसभा में मुनि श्री तरुणसागर जी को उदबोधन हेतु आमन्त्रण देकर वे मुकर गए, दूसरी और तहसीन पूनावाला की मुनि श्री पर गलत टिप्पणी का समर्थन करने के बावजूद उन्हें ना तो कोई पश्ताताप हैं और ना ही कोई अफ़सोस,उल्टा वह IBN -7 पर मुनि श्री तरुण सागर जी की मुनिचर्या पर बहस हेतु उतारू था, यानि उसे इस कृत्य पर किसी तरह की शर्मिंदगी नही हैं, ताज्जुब यह हैं कि कॉंग्रेस पार्टी जिसमें अतीत में प्रकाश चन्द्र सेठी (मध्य प्रदेश) विरधी चन्द जैन (बाड़मेर) वर्तमान में भी जवाहर लाल दर्डा एंव विजय दर्डा, प्रदीप जैन आदि अनेक नेता रहे, उस पार्टी से जुड़ा एक युवा नेता जैन मुनि के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी कर सम्पुर्ण जैन समुदाय की भावनाओं ठेस पहुंचाए और उस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मूकदर्शक बना रहे ये हैरान करने वाला दृष्टान्त हैं, कॉंग्रेस पार्टी को अविलम्ब रूप से तहसीन पूनावाला को पार्टी से बाहर का रास्ता बताना चाहिए,
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लेखक-गणपत भंसाली (सूरत)
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इस घटनाक्रम के पश्चात पुरे देश में इन तत्वों का विरोध हो रहा हैं, लेकिन विरोध के इस क्रम में हम सभी जैन समुदाय से जुड़े बन्धुओं को जोश के साथ होश भी रखना हैं, ऐसा ना हो कि हमारा विरोध का स्तर उसी पैमाने पर आकर खड़ा हो जाए जिसके लिए हमारा समाज संघर्ष रत हैं, हमे यह सावधानी बरतनी होगी कि सोश्यल मीडिया के फेसबुक, वाट्सएप व ट्विटर आदि माध्यमो से प्राप्त किसी ऐसे विवादास्पद मेसेज को पोस्ट या फॉरवर्ड करने से बचना हे जो कहीं विवाद को जन्म नही दे दे, हमारा एतराज दृष्टता करने वाले व्यक्ति से हैं अतः हम कोई ऐसी पोस्ट को प्रेषित ना करें जिसमें स्तरहीन भाषा का उपयोग किया गया हो या जाति सूचक व एतराज वाले शब्द इस्तेमाल किए गए हो, हमे यह स्मरण रखना चाहिए कि हम दया अहिंसा व करुणा के सन्देश से पोषित जैन समुदाय से जुड़े हुए हैं, हमारी भाषावली आपत्तिजनक एंव उतेजना को बढ़ावा देने वाली कदापि नही होनी चाहिए, हमे यह भी स्मरण रखना चाहिए कि हम इन दिनों क्षमा पर्व पर्युषण पर्व की आराधना में लीन हैं, आगामी दिनों दस लक्षण पर्व भी प्रारंम्भ हो जाएगा, अतः हमे यह हर सम्भव प्रयास करना हैं कि हमारा विरोध शांतिपूर्वक व शालीनता पूर्वक हो,
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गणपत भंसाली
Jasolwala@gmail.com