Friday, 15 July 2016

आतंकवाद तेरा धर्म नही ..डॉ सुलक्षणा विकास



ऐ जाकिर! जिंदगी में पहली मर्तबा तूने कुछ सही कहा,
 चल आंतकियों को सजा देने का हक अल्लाह का रहा।
 तेरे इस ब्यान ने हमारी सेना का काम आसान कर दिया, 
आंतकियों को अल्लाह से मिलाने का जज्बा भर दिया।
 अब सेना उन्हें गिरफ्तार करने की बजाए मार गिराएगी,
 उनकी रूह को पल भर में उस अल्लाह से मिलवाएगी। 
 फिर उस अल्लाह की मर्जी उन्हें सजा दे या ईनाम बख्शे,
 उन्हें चाहे दोज़ख़ बख्शे या जन्नत की हूरें तमाम बख्शे।
 पर मेरे जेहन में उठते सवाल का बता कब जवाब देगा,
 आंतकवाद का कोई धर्म नहीं फिर क्यों वो हिसाब लेगा।
 जाकिर! तेरे जवाब का मुझे बड़ी बेसब्री से इंतजार रहेगा, 
सुलक्षणा की कलम के आगे छोटा तेरा हर हथियार रहेगा।
 ©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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